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रिश्तों का अलाव 0

रिश्तों का अलाव

कभी ज़िन्दगी से रूबरू हो कर देखा हैं ?कभी रिश्तों का अलाव तापा हैं ? सर्द सियाह रात की तपिश से जलते हुएकभी चोटी पे बैठे उस सन्यासी कोमहसूस किया हैं अपने अंदर? इच्छाओं...

ह्रदय विहान 0

ह्रदय विहान

अबाध गति से बहता पानीकहता……जग तू अस्थिर……मैं ही शाश्वततू रहता…….हर पल बदलतातेरी काया….तेरी छायाबदलती रहती….हर दिन हर पल मैं अविराम चलाचल प्राणीतंत्री प्राण समाहित जल मेंजो मैं कल था आज वही हु, किनारे बैठा...

नभ के आलिंगन में 0

नभ के आलिंगन में

नभ के आलिंगन मेंविविधताओं का ये देश बड़ा, सुमधुर संगम धर्मों काभाषाओँ में है स्नेह छुपा, शीश ललाट है हिम शोभितवरुणेश्वर हर पल पग धोता, इस सुन्दर पट पर जाने क्यूँचिंगारी की हैं इक...

ईश्वर का रूप 0

ईश्वर का रूप

सुबह सुबह की कोमल किरणेजब नदियों को छु जाती है,इठलाती बलखाती लहरेंझिलमिल सी झांकी लाती है, नत मस्तक हो हिम-पर्बत भीउसको शीश नवाता है,कल-कल ध्वनि का सुमधुर गायनपल-पल को युग कर जाता है,रात्रि काल...

LIBERATION 0

Liberation: the true bliss!

Have you ever experienced the bliss of liberation in your life? If not, the life is futile despite having all the achievement and accomplishments! Most of us bear several fears within us which acts...

Gem of Life 0

Gem of Life

Sitting at the edge of a road was a rag picker, happy but confused about something which he had collected from a hoard of garbage. This was a shining object which has grabbed his...

increasing crime into teenager 0

युवाओं में बढ़ता अपराध

आज हम बात करना चाहेंगे आपराधिक कारनामों में लिप्त होते जा रहे युवाओं की और इन अपराधों के प्रति संवेदनहीन होते समाज की।एक समय था जब सिर्फ क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले और आदतन अपराधी किस्म...

7 tips for effective mind reading 0

7 tips for effective mind reading

The ability to read someone’s mind is not a supernatural gift, rather this is the mix of careful observation and intelligent and meaningful interpretation of the person’s language and body language, including his or...

धन का दंश 0

धन का दंश

कितना है श्रृंगार जनम मेंउदगार फिर क्यूँ है मन में, धन लालायित मनुष्यता काअंतिम जब आधार मरण में, दिशा विहीन मनुष्यता जबपशुता संग ही ओझल हो गयी, सिक्को की झंकार न जानेउन्नति का अभिशाप...